खेजड़ली दिवस
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कब: प्रतिवर्ष 12 सितंबर
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शुरुआत: 1978
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खेजड़ी का महत्व:
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खेजड़ी पेड़ पश्चिमी राजस्थान का सबसे प्रमुख
वृक्ष है।
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वर्ष 1982-83: खेजड़ी
को राजस्थान का राजकीय वृक्ष घोषित किया गया।
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खेजड़ली मेला: प्रतिवर्ष भाद्रपद
शुक्ल दशमी को आयोजित होता है।
अमृता देवी
बिश्नोई (पर्यावरणविद्,
शहीद)
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निवास स्थान: खेजड़ली गाँव, जोधपुर
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घटना: वर्ष 1730: जोधपुर
के महाराजा द्वारा पेड़ों को काटने के आदेश दिए गए।
1730 में,
जोधपुर के तत्कालीन महाराजा अभय सिंह ने अपने नए महल के निर्माण
के लिए चूना जलाने हेतु खेजड़ी के पेड़ों को काटने का आदेश
दिया । अमृता देवी ने पेड़ों को काटने का विरोध किया, जो विश्नोई धर्म के लिए महत्वपूर्ण
थे। उसने प्रसिद्ध रूप से कहा कि वह पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान दे देगी।
किंवदंती के अनुसार, देवी ने पेड़ को गिरने से रोकने के
लिए उसके तने के चारों ओर अपनी बाहें डाल दीं; जवाब में,
राजा के आदमियों ने उसका सिर काट दिया।
अमृता देवी ने अपनी तीन पुत्रियोंआसू, रतनी, भागू (बेटियाँ)
के साथ इन
पेड़ों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया।
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महत्व: यह घटना पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों की रक्षा के
लिए बलिदान की प्रेरणा बन गई।
खेजड़ली आंदोलन
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तारीख: 2 सितंबर, 1730
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स्थान: मारवाड़ (अभय सिंह के
शासनकाल में)
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नेतृत्व: अमृता देवी बिश्नोई
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मुख्य उद्देश्य: पेड़ों को काटने से
रोकने के लिए पेड़ रक्षा का आंदोलन
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शहीदों की संख्या: 363 (जिसमें
69 महिलाएँ शामिल थीं)
यह
आंदोलन पर्यावरण संरक्षण का एक ऐतिहासिक उदाहरण है, जहां अमृता देवी ने अपने
जीवन का बलिदान देते हुए पेड़ों की सुरक्षा की प्रेरणा दी, जो
आज भी बिश्नोई समाज और राजस्थान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में मानी
जाती है।
अमृता देवी पुरस्कार
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शुरुआत: वर्ष 1994-95
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प्रस्तुति: यह राजस्थान वन विभाग
का सर्वोच्च पुरस्कार है।
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उद्देश्य:
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यह पुरस्कार वृक्षारोपण, वन,
और वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले
व्यक्ति या संस्था को प्रदान किया जाता है।
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पुरस्कार राशि: 50,000 रुपये
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प्रथम अमृता देवी पुरस्कार:
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वर्ष: 1994
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प्राप्तकर्ता: गंगाराम बिश्नोई
(जोधपुर)
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कारण: वन और वन्य जीव
संरक्षण में उनके योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया था।
यह
पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को मान्यता देता है जो पर्यावरण संरक्षण के
क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और अमृता देवी के बलिदान की याद
में प्रेरणा का प्रतीक है।
अमृता देवी स्मृति पुरस्कार - 75वाँ
राज्य स्तरीय वन महोत्सव
कार्यक्रम स्थल और तिथि:
- आयोजन स्थल: एस.डी.आर.एफ. कैम्पस, गाड़ौता, मौजमाबाद,
दुदु
- तिथि: 7 अगस्त, 2024
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने वन विकास और वन्यजीव संरक्षण के
क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को अमृता देवी स्मृति पुरस्कार प्रदान
किया।
पुरस्कार प्राप्तकर्ता:
1.
वन विकास
एवं वन्य जीव सुरक्षा श्रेणी:
वर्ष
2020: वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति, उदयपुर
2.
वन विकास
,संरक्षण वन सुरक्षा श्रेणी:
- वर्ष 2019:
श्री नारायण लाल कुमावत
- वर्ष 2020:
श्री श्याम सुन्दर पालीवाल, राजसमंद
- वर्ष 2021:
सुश्री अभिलाषा, सीकर व श्री बच्चू सिंह
वर्मा, भरतपुर
- वर्ष 2022:
श्री पवन कुमार जैन, कोटा
2. वन्यजीव
संरक्षण एवं सुरक्षा श्रेणी:
- वर्ष 2020:
श्री गजेन्द्र सिंह मांझी, नागौर
- वर्ष 2021:
श्री पदम सिंह राठौर, उदयपुर
- वर्ष 2022:
श्री मोहित शर्मा व सुश्री दिव्या शर्मा, जयपुर (संयुक्त रूप से)
कार्यक्रम का महत्व:
इस महोत्सव का उद्देश्य वन संरक्षण, विकास,
और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना और इस
क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को सम्मानित करना है।

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